खामोश लब है झुकी है पलके दिल मे उल्फत नही है,अभी तकअल्ल है गुप्तगू मे कभी मोहब्बत नही नही है,अभी ना आयेगी नीट हमको सभी ना हम को सुकून मिलेगा,अभी धडके का दील जोरो से क्यू कि हम भी मोहब्बत नही नही है।

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ganesh ustav